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इतना ना मुझ से तू प्यार बढ़ा......

इतना ना मुझ से तू प्यार बढ़ा, के मैं एक बादल आवारा
कैसे किसी का सहारा बनू, मैं खुद बेघर बेचारा
इसलिए तुझ से मैं प्यार करू, के तू एक बादल आवारा
जनम जनम से हूँ साथ तेरे, हैं नाम मेरा जल की धारा

मुझे एक जगह आराम नहीं, रुक जाना मेरा काम नहीं
मेरा साथ कहा तक दोगी तुम मैं देस बिदेस का बंजारा

ओ नील गगन के दीवाने, तू प्यार ना मेरा पहचाने
मैं तब तक साथ चलू तेरे, जब तक ना कहे तू मैं हारा

क्यों प्यार में तू नादान बने, एक पागल का अरमान बने
अब लौट के जाना मुश्किल हैं, मैने छोड़ दिया हैं जग सारा

Heard this beautiful song from film Chhaaya.

I am amazed at the simplicity of the lyrics (By Rajinder Krishan) and the depth that they convey..... 

The Hero has been compared with a cloud, full of desires and ambitions, but also perhaps unclear of exact goals. His only desire is to soar up and touch the sky. 

The Heroine on the other hand, simply loves the hero for what he is and is willing to forsake the entire world for her beloved.

The duet contrasts these two aspects: ambition and uncomplicated love. It discusses two separate realms; realm of logic and realm of emotion.

The last couplet really touched my heart.

क्यों प्यार में तू नादान बने, एक पागल का अरमान बने
अब लौट के जाना मुश्किल हैं, मैने छोड़ दिया हैं जग सारा

Hero tries to give a logic and advises heroine to leave. The heroine says plainly: I have left the entire world. (Come what may I will stay with you).

Viewers are left with the idea that for a person in love, realm of logic is meaningless.

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